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IAS Success Story: पिता करते थे मजदूरी, दिव्यांगता को हरा बेटा मनीराम क्लर्क से बना IAS अधिकारी

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IAS Success Story: पिता करते थे मजदूरी, दिव्यांगता को हरा बेटा मनीराम क्लर्क से बना IAS अधिकारी

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IAS Success Story: राजस्थान के रहने वाले मनीराम शर्मा को दिव्यांग होने की वजह से कभी चपरासी की भी नौकरी नहीं मिली थी। ऐसे में उन्होंने पहले क्लर्क की परीक्षा पास की और बाद में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बन गए।

IAS Success Story: पंखों से कुछ नहीं होता, हौंसलों से उड़ान होती है, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान में होती है। यह पंक्तियां सच कर दिखाई हैं राजस्थान के रहने वाले मनीराम शर्मा ने, जिन्हें बचपन से ही सुनने में परेशानी थी। वहीं, एक समय ऐसा भी आया कि जब उनकी शारीरिक अक्षमता की वजह से उन्हें चपरासी की नौकरी देने से लोगों ने मना कर दिया था। हालांकि, उन्होंने हार न मानते हुए अपने हौंसले को बनाए रखा और क्लर्क की परीक्षा पास की। इसके बाद अपनी दिव्यांगता को हराकर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास कर आईएएस अधिकारी बन गए।

मनीराम शर्मा का परिचय

मनीराम शर्मा मूलरूप से राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले हैं। मनीराम का बचपन गरीबी में गुजरा। उनके पिता मजदूरी करते थे, जिससे घर का खर्च चलता था। वहीं, मनीराम पांच किलोमीटर दूर स्कूल का सफर पैदल किया करते थे।

चपरासी की नहीं मिली नौकरी

परिवार में आर्थिक तंगी होने की वजह से मनीराम के पिता ने कक्षा 10वीं के बाद मनीराम को नौकरी पर लगाने का फैसला किया। इसके लिए वह उन्हें एक जगह चपरासी की नौकरी के लिए लेकर गए। हालांकि, बचपन से सुनने में अक्षम होने की वजह से उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया गया। जब यह बात मनीराम को पता चली, तो वह बहुत दुखी हुए और सरकारी सेवा में जाने का निर्णय लिया।

क्लर्क की परीक्षा पास की

मनीराम शर्मा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। उन्होंने क्लर्क की परीक्षा का फॉर्म भरा और तैयारी जारी रखी। इस बीच उन्होंने परीक्षा पास कर ली। वहीं, उन्होंने इसके साथ अपनी स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की। यही नहीं उन्होंने आगे पढ़ाई करते हुए पीएचडी की स्कॉलरशिप भी हासिल की। हालांकि, इसके बाद उन्होंने और बड़े पद पर नौकरी करने का निर्णय लिया।

यूपीएससी की तैयारी शुरू

मनीराम शर्मा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने 2005 में परीक्षा पास की, लेकिन शरीरिक रूप से अक्षम होने की वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी। वहीं, उन्होंने फिर से प्रयास किया। इस बार उन्हें पोस्ट एंड अकाउंट्स में नौकरी मिली, लेकिन वह इससे खुश नहीं थे।

नौकरी के लिए करवाया कानों का ऑपरेशन

मनीराम शर्मा ने आईएएस की नौकरी हासिल करने के लिए अपने कानों का ऑपरेशन करवाया, जिसके बाद उन्हें ठीक से सुनाई देने लगा। ऐसे में साल 2009 की परीक्षा में उन्होंने सफलता हासिल करते हुए अपना आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया था।

मनीराम की कहानी हमें बताती है कि यदि अपने लक्ष्य को पाने का निश्चय किया जाए और उसके लिए मेहनत करें, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता है। इसके लिए कभी हार न मानने वाला रवैया अपनाना होगा, तभी मंजिल से गले मिला जा सकता है।

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