Home Muzaffarpur मौसम की बेरुखी से मुजफ्फरपुर में आलू की फसल को झुलसा रोग

मौसम की बेरुखी से मुजफ्फरपुर में आलू की फसल को झुलसा रोग

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मौसम की बेरुखी से मुजफ्फरपुर में आलू की फसल को झुलसा रोग

मुजफ्फरपुर, जासं। Muzaffarpur Weather Update: मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। सोमवार को सुबह में जबरदस्त कुहासा रहा। दिन में धूप निकली। शाम में ठंड का असर दिखा। इस बीच मौसम की बेरुखी से आलू, दलहनी और तिलहनों फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

आलू में झुलसा रोग का प्रभाव दिखने लगा है। किसान पौधा सरंक्षण विभाग को इसकी शिकायत कर रहे हैं। पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक राधेश्याम कुमार ने बताया कि अभी अलग-अलग जगह से पांच एकड़ में झुलसा रोग लगने की सूचना मिली है।

वह खुद मीनापुर के धर्मपुर पंचायत में जाकर वहां हैदर अली की खेत का निरीक्षण किए। दो एकड में झुलसा का प्रभाव है। उनको उचित दवा के प्रयोग का परामर्श दिया गया है। इसी तरह से बंदरा, बोचहां व गायघाट से भी एक-एक एकड़ में आलू में रोग की सूचना मिली है।

औराई से दस कठ्ठा फसल में बीमारी की शिकायत है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से हर स्तर पर फसल बचाने की तैयारी चल रही है।

रात में दिख रहा ठंड का व्यापक असर

बारिश व ठंड से तापमान में तेजी से गिरावट आई है। इससे आम जनजीवन तो प्रभावित है। आसमान से बर्फ की तरह रात में पड़ रहे पाले से सब्जी की फसल सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो गया है।

दलहन की फसल तो चपेट में है ही, सबसे अधिक नुकसान आलू को हो रहा है। मौसम की बेरुखी से तिलहन की फसलों का भी खेल खराब होने की आशंका है। झुलसा, मांहू व फंफूदनाशी रोग का प्रकोप फसलों की सेहत बिगड़ रहा है।

करीब 30 दिनों से बदले मौसम के मिजाज से तापमान में तेजी से गिरावट हुई। पारा नौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। रात के समय तो स्थिति और विकराल हो जाती है। वरीय मौसम वैज्ञानिक डा. ए सत्तार ने कहा कि अगले तीन दिनों तक ठंड का असर रहेगा।

कुहासे से आलू की फसल को छोड़कर लगभग सभी फसलों खासकर गेहूं को काफी लाभ पहुंचा है। तापमान तिलहन व दलहन फसलों के लिए भी अच्छा है। इससे कम तापमान होने पर तिलहन व दलहन फसलों की प्रतिरोधक क्षमता पर असर पडऩे लगता है।

फसल वृद्धि करने की बजाय अपने जीवन के लिए संघर्ष करने लगती है। इस मौसम से आलू में झुलसा, सरसों में मांहू रोग व अरहर में फलीछेदक कीटों का प्रकोप बढ़ेगा। कहा कि यदि आलू, सरसों व मटर में किसानों को झुलसा का प्रकोप दिखे तो तत्काल उपचार करें। रीडोमिल एमजेड का दो ग्राम प्रति लीटर घोल बनाकर प्रति बीघा फसल में छिड़काव किया जा सकता है।

 

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