
[ad_1]

ललित नारायण विवि के प्रोफेसर को मिली धमकी भरी चिट्ठी।
– फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
विस्तार
बिहार से एक और अनोखी खबर है। आम पाठकों के लिए अनोखी, मगर जिनसे जुड़ी है उनके लिए खौफनाक। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को हस्तलिखित चिट्ठी मिली है और इसमें लिखा है कि फलां गुनहगार है और अल्लाह का आदेश मानकर उसका 20 किलोमीटर से ज्यादा दूर ट्रांसफर करो, वरना तुम्हारे सिर को तन से जुदा कर देंगे। रजिस्टर्ड डाक से यह चिट्ठी भेजने वाले ने अपना नाम आलम प्रवेज लिखा है। चिट्ठी टूटी-फूटी हिंदी में है और उसपर हस्ताक्षर उर्दू में है। चिट्ठी मिलने के बाद से रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम मोहन मिश्रा और उनका पूरा परिवार सहमा हुआ है। मिश्रा का कहना है कि चिट्ठी में जिस आरोप की बात कही जा रही, वह उनके कार्यकाल का नहीं है और जिसपर आरोप लगाया जा रहा है, उनके ट्रांसफर का अधिकार भी उन्हें नहीं है।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम मोहन मिश्रा ने पुष्टि की कि उन्हें एक पत्र के जरिए जान से मारने की धमकी मिली है। पुलिस इसे गंभीरता से ले और धमकी देने वालों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे। उनका पूरा परिवार दहशत में है। उन्होंने कहा कि चिट्ठी में जिस वाकये का जिक्र है, उस बारे में पता किया। पता चला कि 20-25 वर्ष पहले यहां एक मेडिकल एग्जाम का सेंटर था। उस वक्त कुछ छात्रों से किताबें छीनी गई थीं और कुछ हंगामा भी हुआ था, लेकिन तब मैं यहां कार्यरत नहीं था। इसके बावजूद कथित दोषी का ट्रांसफर नहीं करने पर सिर कलम करने की धमकी मिली है।
चिट्ठी की भाषा सुधारें तो ऐसे पढ़ सकते हैं-
“जनाब मोहन मिश्रा, आपको कुछ काम दिया जा रहा है। काम नहीं करने पर जिहादी आपके सिर को तन से जुदा करेंगे। रसायन विभाग के हेड प्रेम मोहन मिश्रा एवं उसके पूरे परिवार का यही हाल होगा। कहीं भी, किसी भी वक्त। अल्लाह का आदेश है कि आपके विभाग में शशि शेखर झा प्रयोग प्रदर्शक को कहीं अन्य विभाग या जीडी कॉलेज बेगूसराय, जो कम से कम 20 किलोमीटर दूरी पर हो बदली करा दें। वह मुसलमानो की बेटी को हमेशा गाली देते रहते हैं। आपको पता होगा कि उस समय विमल चौधरी रसायन विभाग के हेड थे। तब डेंटल कॉलेज के परीक्षा में चोरी का बहाना बनाकर हम छात्रों से किताब जबरन ले लिया गया। फिर परीक्षा समाप्त होने पर कहा गया कि हम किताब नहीं जानते हैं। आप लोग ही किताब ले गए होंगे। मारपीट होने पर केके झा द्वारा बीच बचाव करने पर मामला शांत हो गया। वह किताब और विभाग से पुस्तकालय से चोरी की गई किताब मात्र 17000 में नूतन पुस्तक को बेच दिया गया। हम लोग नूतन पुस्तक से वह किताब पुनः खरीद लिए। उस समय रामविलास यादव, पुस्तकालय अध्यक्ष एवं सुरेंद्र मोहन झा ने बताया कि शशि शेखर झा महाचोर है, जो उस वक्त स्टोर कीपर थे। विभाग के महंगा रसायन की किताब और 32 पंखा 16 गैस सिलेंडर चोरी कर अपने घर तथा गांव भेज दिया। कारण कि ताला का चाबी वही रखते थे। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी ने कहने पर बताया गया कि लिखित दीजिए, चोरी रहस्यमय ढंग से हुआ। हम लोग पुनः परीक्षा देकर आज डॉक्टर बन गए। लेकिन, शशि शेखर झा को माफ नहीं करेंगे। इस पाप का फल प्रेम मोहन मिश्रा भोगेंगे।”
आलम प्रवेज
[ad_2]
Source link