Home Bihar ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में तेजस्वी जेल जाने से नहीं बच सकते! सुशील मोदी ने घोटाले को लेकर खोले कई राज, जानें

‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में तेजस्वी जेल जाने से नहीं बच सकते! सुशील मोदी ने घोटाले को लेकर खोले कई राज, जानें

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‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में तेजस्वी जेल जाने से नहीं बच सकते! सुशील मोदी ने घोटाले को लेकर खोले कई राज, जानें

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जमीन के बदले नौकरी मामले में फंसे लालू परिवार की मुसीबतें बढ़ती जा रही है। अभी तक इस मामले से तेजस्वी यादव बचे हुए नजर आ रहे थे। लेकिन, बीजेपी नेता सुशील मोदी का कहना है कि अब लालू यादव के छोटे बेटे भी जेल जाने से नहीं बच सकते।

सुशील मोदी

हाइलाइट्स

  • सुशील मोदी ने बताया लालू परिवार ने कैसे ली जमीन
  • सुशील मोदी ने खोदा ए. के. इंफोसिस का इतिहास
  • खुलासे के बाद सुशील कुमार मोदी ने उठाये कई सवाल
  • 2015 में भी सुशील मोदी ने खोला था मोर्चा
नीलकमल, पटना: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने जमीन के बदले रेलवे में नौकरी किस प्रकार दी गई इसका पूरा खुलासा किया है। इसके अलावा सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को पूरे विस्तार से घोटाले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि लालू प्रसाद यादव ने किस तरीके से अपने ही समाज के व्यक्ति को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे जमीन लिखवाने का काम किया है। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद का नारा ही था- ‘ तुम मुझे जमीन दो मैं तुम्हारा काम करूंगा’ यानी जमीन के बदले काम करूँगा।

सुशील मोदी ने बताया लालू परिवार ने कैसे ली जमीन

राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने बताया कि लालू परिवार ने कैसे जमीन ली। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव के नाम नई दिल्ली के फ्रेंड्स कॉलोनी में चार मंजिला मकान है। इसकी कीमत करीब 150 करोड़ रुपए होगी। ईडी ने इस मामले में पूछताछ की है। सुशील मोदी के मुताबिक यह आलीशान ‘मकान ए.के.इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड का रजिस्टर्ड कार्यालय है। इसे ए.के. इंफो को पटना के महुआ बाग के रहने वाले हजारी राय ने 21 फरवरी 2007 को सेल डीड से बेचा था। साढ़े नौ हजार वर्ग फुट भूखंड के एवज में 10 लाख 83 हजार रुपए का भुगतान किया गया था। सुशील मोदी ने बताया कि हजारी राय के दो भतीजे दिल चंद्र कुमार और प्रेम चंद कुमार को जबलपुर और कोलकाता में रेलवे में 2006 में नौकरी मिल गई थी। इस ए.के. इंफो के 2014 में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी मालिक बन गए। सुशील मोदी ने बताया कि इस कंपनी के 100 प्रतिशत शेयर राबड़ी और तेजस्वी के नाम है। जबकि इस कंपनी की डायरेक्टर लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी रागनी यादव हैं। इस तरह से साल 2014 से इस कंपनी पर लालू परिवार का एकाधिकार है।

सुशील मोदी ने खोदा ए. के. इंफोसिस का इतिहास

सुशील मोदी ने बताया कि राबड़ी सरकार के कार्यकाल में अमित कत्याल की कंपनी आइसबर्ग इंडस्ट्री ने बिहटा में शराब की फैक्ट्री लगाई। इस कंपनी में लालू परिवार के लोग भी डायरेक्टर थे। इसी अमित कत्याल के नाम अमित कत्याल इंफो सिस्टम नामक कंपनी बनी। अमित कात्याल की एक अन्य कंपनी ट्राईगंल ट्रेडिंग लि. की ओर से 2010 में तेजस्वी यादव को 9.5 लाख रुपया की गाड़ी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने दावा किया कि अमित कात्याल ने 30.26 लाख तेजस्वी को और 55.51 लाख तेज प्रताप को कर्ज दिया, जो बाद में राइट ऑफ कर दिया गया। सुशील मोदी के अनुसार ए.के. इंफोसिस का जमीन खरीद पटना और दानापुर सर्किल के विभिन्न मौजा है। इनमें चितकोहरा, सलेमपुर, चितनावां, बभनगावां और पानापुर में 21 भूखंड शामिल है। जिसका क्षेत्रफल 221 डिसमिल है। इसे 2007-10 के बीच 2 करोड़ 16 लाख में खरीदा गया। इस कंपनी को जमीन खरीदने के लिए अमित कात्याल ने 45 लाख 50 हजार का ऋण दिया। राबड़ी देवी ने भी 1 करोड़ 54 लाख का लोन दिया। इस प्रकार तेजस्वी यादव ए.के.इंफो के माध्यम से करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन बैठे।

इस खुलासे के बाद सुशील कुमार मोदी ने उठाये कई सवाल

बीजेपी सांसद ने इस खुलासे के बाद कई सवाल उठाये। उन्होंने सुशील मोदी ने पूछा अमित कत्याल ने लालू के बेटे-बेटियों को क्यों अपनी कंपनी का डायरेक्टर बनाया? क्यों कात्याल परिवार ने एक लाख में अपने सारे शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी को दे दिया? क्यों अमित कात्याल ने 45 लाख का कर्ज दिया जो आज तक वापस नहीं हुआ? क्यों ए.के.इंफो द्वारा रेलवे में नौकरी के लाभार्थी से जमीन लिखवा लिया? क्यों इस कंपनी ने 1 करोड़ 89 लाख के अनेक भूखंड खरीदे? क्यों इस कंपनी ने अपने स्थापना काल से आज तक कोई व्यवसाय नहीं किया? क्यों कंपनी ने कोई टर्न ओवर नहीं किया केवल जमीन खरीदने का काम किया? कैसे तेजस्वी यादव मात्र 15 हजार खर्च कर करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए? क्यों अमित कात्याल और उनके भाई राजेश कात्याल ने इस कंपनी के सारे शेयर 1 लाख में राबड़ी देवी और तेजस्वी को बेच दिया? तेजस्वी यादव, चंदा यादव, तेज प्रताप लंबे समय तक इस कंपनी के डायरेक्टर भी थे? क्यों इस कंपनी का इस्तेमाल रेलवे नौकरी के लाभार्थी की जमीन लिखवाने में किया गया? क्या कारण है कि लालू के रेल मंत्री के दौरान ही अधिकांश जमीन खरीदी गई?

2015 में भी सुशील मोदी ने खोला था मोर्चा

2015 में जब नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की आरजेडी के साथ मिलकर बिहार में महागठबंधन सरकार का गठन किया था। तभी से बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने इस पूरे मामले का खुलासा करना शुरू किया था। 2017 में सुशील कुमार मोदी ने लालू परिवार की ओर से जमीन के बदले नौकरी मामले का खुलासा था। उन्होंने तेज प्रताप यादव के पेट्रोल पंप और सगुना में बिहार के सबसे बड़े मॉल से लेकर मिट्टी घोटाले तक का पर्दाफाश किया था।

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