
मुजफ्फरपुर, जासं। देश के विभिन्न राज्यों में लीची भेजने के बाद अब इनके पौधों को भेजने की तैयारी है। इस बार हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में अक्टूबर से पौधे भेजे जाएंगे। मुशहरी स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (एनआरएलसी) के लीची बैंक में 50 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। निदेशक डा. शेषधर पांडेय का कहना है कि देश के विभिन्न शहरों में लीची के बाग तैयार हो रहे हैं। पिछले सीजन में भी 40 हजार पौधे विभिन्न शहरों में भेजे गए थे।
नए बाग लगाने की तैयारी
निदेशक का कहना है कि लीची का मौसम समाप्त हो रहा है। अगली फसल के लिए पुराने बागों की देखभाल व नए की तैयारी में किसान जुटे हैं। इस वर्ष हरियाणा के पानीपत व करनाल से 1500 और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, सीतापुर, देवरिया व गोरखपुर से दो हजार पौधों की मांग है। जम्मू और मध्यप्रदेश के बैतूल व होशंगाबाद से भी सौ-सौ पौधों की मांग आई है।
देश के कई विश्वविद्यालयों में भेजे जाएंगे पौधे
एनआरसीएल में विकसित लीची की तीन प्रजातियां गंडकी योगिता, गंडकी लालिमा और गंडकी संपदा देश के सात अन्य राज्यों के किसानों को उपलब्ध कराने की कवायद चल रही है। अखिल भारतीय समन्वित फल अनुसंधान परियोजना के तहत इन प्रजातियों के 50-50 पौधे भेजे जाएंगे।
इनमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना, विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय मोहनपुर, पश्चिम बंगाल, गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड, आरसीइआर रिसर्च सेंटर नामकूम रांची झारखंड, डा. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी आफ हार्टिकल्चर एंड फोरेस्ट्री सोलन, हिमाचल प्रदेश और सेंट्रल हार्टिकल्चरल एक्सपेरिमेंट स्टेशन, चेट्टाली, कर्नाटक शामिल हैं।