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यूपी आने से ठीक पहले क्या कह दिया
राहुल गांधी ने यह बयान भारत जोड़ो यात्रा के यूपी में प्रवेश से ठीक पहले दिया है। पहले ऐसा कहा जाता रहा था कि कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा का यूपी में काफी संक्षिप्त कार्यक्रम इसीलिए रखा है क्योंकि उसे भी पता है कि यूपी में उसका जनाधार अब नहीं रहा। खुद राहुल गांधी यहां से संसदीय चुनाव हार चुके हैं। भारत जोड़ो यात्रा का रूट भी उन्हीं इलाकों से गुजरा, जहां कांग्रेस मजबूत स्थिति में थी। यूपी में पार्टी को कई जमीन वापस दिलाने आईं प्रियंका गांधी भी बीते लोकसभा और विधानसभा में बुरी तरह असफल रहीं।
भारत जोड़ो की भूमिका
ऐसे में राहुल का विपक्षी दलों को लेकर दिया गया यह बयान यूपी में भारत जोड़ो यात्रा की भूमिका के तौर पर देखी जा रही है। ऐसा लगता है, जैसे कांग्रेस को भूल चुके वोटर्स को याद दिलाने की कोशिश की जा रही हो कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अगर कोई पार्टी टक्कर ले सकती है तो वह कांग्रेस ही है। सिर्फ राहुल नहीं, इससे पहले कमलनाथ ने भी शुक्रवार को कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 में राहुल गांधी ही विपक्ष का चेहरा होंगे। इतना ही नहीं, वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी होंगे।
यूपी में कांग्रेस की हालत
यूपी में कांग्रेस की स्थिति फिलहाल काफी दयनीय है। पार्टी के पास यहां सिर्फ दो विधायक हैं और एकमात्र सांसद सोनिया गांधी हैं। यहां दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से मामला दो पक्षों में बंट गया है। एक तरफ सत्ताधारी बीजेपी और दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी सपा है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस यूपी में सपा की ही जगह लेना चाहती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने बयान में सपा का उदाहरण दिया।
राहुल ने कहा कि सपा का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित है। उसका आइडिया यहां से बाहर काम नहीं आएगा। उन्होंने अपील तो की कि ऐसी सभी क्षेत्रीय पार्टियों को कांग्रेस के साथ आना चाहिए लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सपा की यूपी में पोजिशनिंग है। उसको डिफेंड करने के लिए हो सकता है कि वो (हमारे साथ) न आएं। लेकिन इसके जरिए राहुल ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ (यूपी में भी) असली विकल्प कांग्रेस ही है, सपा नहीं है।
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