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रिपोर्ट-अभिषेक रंजन
मुजफ्फरपुर. गुड़ और तिल दोनों की तासीर गर्म होती है. यही कारण है कि ठंड का मौसम शुरू होते ही बाजार में गुड़ और तिल से बने तिलकुट की खुशबू बिखरने लगती है. मुजफ्फरपुर में भी इन दिनों तिलकुट की खुशबू बाजार में बिखरने लगी है. गया जिले का तिलकुट बनाने के मामले में अपना एक ब्रांड वैल्यू है, इसलिए अन्य शहरों में भी लोग अब गया से ही कारीगर बुलाकर तिलकुट तैयार करवाते हैं. तिलकुट अब बिकने लगे हैं, जो कि मकर संक्रांति के बाद फरवरी तक लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा.
20 साल से मुजफ्फरपुर में दुकान लगाते हैं विनोद
दरअसल, तिलकुट खाने में जितना लाजवाब लगता है, उतना ही जटिल इसे बनाने की प्रक्रिया है. गुड़ की लड़ियों में भुने हुए तिल को मिला कर तिल और चासनी को कूटा जाता है. इसी कूटने की प्रक्रिया के कारण इसका नाम तिलकुट रखा गया. तिलकुट एक लजीज मिठाई है, जो जाड़े के वक्त में ही खाई जाती है. मुजफ्फरपुर के सरैयांगज टावर के पास स्थित विनोद जी तिलकुट वाले का तिलकुट मुजफ्फरपुर में नामी है. तकरीबन 20 साल से यह दुकान मुजफ्फरपुर वालों को तिलकुट का स्वाद चखा रही है. दुकानदार विनोद बताते हैं कि नवंबर के शुरुआत से जनवरी के अंत तक वह अपनी दुकान मुजफ्फरपुर के सरैयांगज टावर के पास लगाते हैं.
हर दिन तैयार होता है एक क्विंटल तिलकुट
विनोद कहते हैं कि हमारा तिलकुट इसलिए खास है, क्योंकि हमारे पास गया से बुलाए गए चुनिंदा कारीगर हैं. बिहार का गया जिला तिलकुट की दुनिया का बादशाह है. इसलिए गया वाला स्वाद मुजफ्फरपुर में दिलाने के उद्देश्य से मुजफ्फरपुर में ही गया के कारीगरों को बुलाया जाता है.
विनोद का तिलकुट मुजफ्फरपुर में लगने वाले तिलकुट दुकानों में सबसे चर्चित है. इसकी वजह भी यही है. विनोद बताते हैं कि उनकी दुकान पर 320 रुपए से 500 रुपए तक के तिलकुट उपलब्ध हैं. चीनी और गुड़ के अलावा विनोद खोया वाला तिलकुट भी लोगों को खिलाते हैं. अभी हर दिन गया के कारीगर 1 क्विंटल तिलकुट तैयार कर लेते हैं.
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प्रथम प्रकाशित : 23 दिसंबर, 2022, 18:06 IST
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