Home Bihar Student in Ukraine Crisis : सड़कों पर रूसी टैंक, टैक्‍सी मिल नहीं रही, बॉर्डर तक कैसे पहुंचें बताए दूतावास?

Student in Ukraine Crisis : सड़कों पर रूसी टैंक, टैक्‍सी मिल नहीं रही, बॉर्डर तक कैसे पहुंचें बताए दूतावास?

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Student in Ukraine Crisis : सड़कों पर रूसी टैंक, टैक्‍सी मिल नहीं रही,  बॉर्डर तक कैसे पहुंचें बताए दूतावास?

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पटना : यूक्रेन (Ukraine) के हालात लगातार खराब हो रहे हैं। रूस (यूक्रेन रूस युद्ध) की सेना शहर पर कब्‍जा कर चुकी है। रूसी टैंक शहर में घुस चुके हैं। आसमान से गोले बरसाए जा रहे हैं। जंगी जहाज यूक्रेन के आसामान में गड़गड़ा रहे हैं। दिन में रह रह कर धमाकों की आवाज आ रही है। रात में आसमान से बरसती गोलियां देखाई दे रही हैं। फायरिंग की आवाज से भारतीय छात्र डरे हुए हैं। ऐसे में कैसे निकलें? ये सवाल है यूक्रेन में फंसी छात्रा (Student in यूक्रेन संकट ) विषाखा के।
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शहर में कर्फ्यू, सड़क पर रूसी टैंक
बिहार के पश्चिमी चंपारण की छात्रा विषाखा ने बताया कि यूक्रेन सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षा देने में असमर्थ है। यूक्रेन में कर्फ्यू लगा है। वाहन बंद हैं। टैक्‍सी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट वगैरह सब बंद हो चुके हैं। सड़कों पर रूसी सैनिकों के टैंक (Russian Tanks on Streets) नजर आ रह हैं। ऐसे में 400 किलोमीटर कैसे पहुंचे? विषाखा ने बताया कि वो ओदिशा में जिस जगह रह रही हैं वहां से रोमानिया की सीमा 400 किलोमीटर है। भारतीय दूतावास (Indian Embassy) फोन नहीं उठा रहा है। अब बताइए यूक्रेन से लगी दूसरे देश की सीमाओं पर कैसे पहुंचें?

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रूसी टैंकों को चकमा देकर 400 जाना बड़ा रिस्‍क
विषाखा ने घबराई आवाज में बताया कि 400 किलोमीटर जाना बहुत बड़ा रिस्‍क हो सकता है। ऐसे में हमारे पास कोई चारा नजर नहीं आ रहा है। टैक्‍सी वाले यहां के हिसाब से 80 हजार रुपए मांग रहे हैं। इतना पैसा कहां से लाएं? हम स्‍टूडेंट हैं। बिषाखा ने बताया कि जैसी कंडीशन हमारी है वैसी भारत से यहां पढ़ाई करने आए हजारों छात्रों की है।

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एक जगह रुक गई जिंदगी
विषाखा ने बताया कि सब कुछ बहुत अच्‍छा चल रहा था। ज्‍यादातर छात्र पढ़ाई के साथ यूक्रेन में अलग अलग एक्‍टिविटी में भाग लेते हैं। जंग के ऐलान के बाद जो जहां थे वहीं उन्‍हें सुरक्षित स्‍थान पर रुकना पड़ा। परेशान विषाखा कहती हैं यूक्रेन में करीब 20 हजार छात्र भारतीय हैं। जो देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में फंसे हैं। हमारी जिंदगी अच्‍छे से चल रही थी लेकिन जंग के ऐलान के बाद सब जहां की तहां रुक गई है।

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