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2016 में की थी आर्मी जॉइन
22 मराठा लाइट इन्फेंट्री का वीर नायक रामानुज कुमार का चयन 23 सितंबर 2016 को हुआ था। महज छह साल में ही देश सेवा करते हुए वे दुनिया को अलविदा कह गए। अत्यंत गरीब परिवार से आने वाले रामानुज ने काफी संघर्ष करते हुए देश सेवा की जज्बे के साथ आर्मी जॉइन किया था। वे अबतक अविवाहित थे। शुक्रवार को रात्रि 9 बजे अचानक उनके घर पर जैसे ही दुखद सूचना पहुंची तो पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। गांव का हर एक आदमी भारत माँ के इस लाल की असामयिक निधन की सूचना से मर्माहत था। इनके बचपन के कई दोस्त हैं जिनके आंखों से आंसू थमने का नाम नही ले रहा था।
हाथों में तिरंगा लेकर लोगों ने लगाए भारत माता की जय के नारे
शहीद जवान रामानुज के पार्थिव शरीर को रिसीव करने के लिए पालीगंज से सभी समुदाय के लोग बाइक पर सवार हो हाथों में तिरंगा व फूल माला लिए अनुमंडल कार्यालय के पास पहुंचे। वहां अनुमंडल पुलिस के जवानों ने शहीद को सलामी दी। इसके बाद वाहनों का काफिला आगे बढ़ा और गांव परियों पहुंचा। वहां सामुदायिक भवन के पास बनाये गए मंच पर पार्थिव शरीर को रखा गया। वहां परिजनों और ग्रामीणों ने दिवंगत सैनिक को श्रद्धासुमन अर्पित किया।
मठिया पुनपुन नदी घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए गांव से निकला पूरा वातावरण देशभक्ति के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। काफी संख्या में लोग फूल माला और तिरंगे के साथ जुलूस की शक्ल में अंतिम संस्कार के लिए निकले। जिन रास्तों से होकर शाहिद का काफिला गुजरा, रास्ते में खड़े लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प वर्षा की। धीरे-धीरे काफिला चंदौस के मठिया गांव के पास पुनपुन नदी के तट पर स्थित मुक्तिधाम पहुंचा। यहां सेना के जवानों ने शाहिद को पुष्पांजलि के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद हिन्दू रीति रिवाज के साथ शाहिद जवान का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि बड़े भाई जयप्रकाश ने दी। वहीं अंत में शहीद को श्रधांजलि देने पहुंचे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय
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