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बीजेपी का गेम चेंजर दांव क्या है?
बीजेपी की कोशिश है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में वो आरजेडी और जेडीयू को कड़ी टक्कर दे सके। जिसका फायदा उसे विधानसभा चुनाव में भी मिलेगा। इसी स्ट्रेटजी पर आगे बढ़ते हुए बीजेपी जहां एक तरफ 7 से 8 परसेंट कुशवाहा और 4 परसेंट कोइरी वोटरों को साधने की कोशिश में है। वहीं बीजेपी चिराग पासवान के जरिए दलित और पिछड़े वोट बैंक को भी अपने खेमें में करने की फिराक में है। बीजेपी को यह लगता है कि अगर उन्होंने इन वोटरों को साथ लिया तो आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी जीत पक्की होगी। साथ ही विधानसभा चुनाव में भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। यह समीकरण बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।
कोइरी-कुशवाहा वोटरों पर बीजेपी की नजर
एक अनुमान के मुताबिक बिहार में 7 से 8 फीसदी वोटर कुशवाहा जाति से आते हैं। वहीं कोइरी वोटरों की संख्या भी चार पर्सेंट के आसपास है। ऐसे में बीजेपी इन वोटरों को भी अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगी हुई है। इसके लिए बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा के लिए बाहें खोल दी हैं। वहीं आखिरी समय में आरसीपी सिंह को भी अपने पाले में लाने की कवायद है। फिलहाल आरसीपी सिंह जेडीयू और नीतीश कुमार से नाराज हैं। वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और जेडीयू की कोटे से केंद्रीय मंत्री भी रहे। लेकिन अब नीतीश कुमार और उनकी पार्टी से नाराज हैं। जिसका फायदा बीजेपी उठाने की कोशिश में है। कोइरी और कुशवाहा वोटों को साधने की रणनीति के तहत उपेंद्र कुशवाहा को केंद्रीय सुरक्षा का घेरा दे दिया गया। वहीं आरसीपी सिंह को भी जल्द ही बीजेपी में शामिल करने की चर्चा है। इसके लिए बीजेपी फिलहाल थोड़ा वक्त ले रही है।
बीजेपी के ‘चाणक्य’ शाह फिर आ रहे बिहार
कुशवाहा और कोइरी वोटरों को साधने की कोशिश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2 अप्रैल को नवादा आएंगे। जबसे नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हुए हैं। तब से बीजेपी के चाणक्य अमित शाह कि नजर बिहार पर कुछ ज्यादा ही है। 6 महीने के भीतर यह उनका चौथा बिहार दौरा होगा। अमित शाह नवादा के हिसुआ में रैली करेंगे। माना जा रहा कि अमित शाह इस रैली के जरिए खास कर कुशवाहा और कोई भी वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे। हालांकि उनके निशाने पर दलित, पिछड़े समाज के वोटर तो होंगे ही। लेकिन जो टाइमिंग तय की गई है। वह यह बताती है कि उनकी कोशिश सम्राट अशोक की जयंती में शामिल होकर कुशवाहा और कोई वोटरों को साधने की है।
ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार, सम्राट अशोक जाति के लिहाज से कुशवाहा हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी समुदाय को साधने के लिए 2015 से सम्राट अशोक जयंती का आयोजन शुरू किया था। अब सम्राट अशोक जयंती के जरिए बीजेपी ने जेडीयू से कुशवाहा समुदाय को अलग करने की रणनीति बनाई है। इसी रणनीति के तहत 2 अप्रैल को सम्राट अशोक की जयंती पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। यह सभा सासाराम में होगी।
मुस्लिम वोटरों को भी जोड़ने में लगी है बीजेपी
एक तरफ जहां बिहार में ओवैसी की एंट्री देखी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी पार्टी स्तर पर भी मुस्लिम वोट बैंक को को जोड़ने में लगी हुई है। इससे पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों को लेकर एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि हम मुस्लिम समुदाय के लोगों को अलग नहीं कर सकते। हमें उनकी चिंता करनी होगी। जिसके बाद बिहार बीजेपी में हर रविवार को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और सुशील कुमार मोदी ने हिस्सा लिया। यानी बीजेपी की रणनीति साफ है। एक तरफ वह जहां मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में है। वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कि बिहार में एंट्री यह बताती है कि बीजेपी की कोशिश जेडीयू और आरजेडी के मुस्लिम वोटरों को तोड़ने की भी है।
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