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बोधगया27 मिनट पहले
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- 03 फरवरी तक जीविका की पहल से पूरा होगा सर्वेक्षण
नीरा से आजीविका सम्वर्धन के उद्देश्य से पारंपरिक रूप से ताड़ी का उत्पादन एवं बिक्री से जुड़े परिवारों का सर्वेक्षण हेतु सभी प्रखंडों में मंगलवार से प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो गई, जो अलग-अलग प्रखंडों में तीन फरवरी तक चलेगी। यह सर्वेक्षण पंचायतवार जीविका मित्रों, सेविका एवं विकास मित्रों के सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए परियोजना कर्मियों सहित सभी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नीरा एक बेहद लाभकारी प्राकृतिक रास है जिसमें अनेक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
नीरा कुछ और नहीं बिना खमीरीकृत ताड़ी ही है। प्रबंधक संचार जीविका दिनेश कुमार ने बताया कि लावनी में एक खास विधि से चुना का लेप कर ताड एवं खजूर के पेड़ का रस इकट्ठा किया जाता है। इस रस को शीत भंडारण कर खमीरीकरण से रोक जाता है, ताकि इसमें अल्कोहल ना बने। इसकी जांच पीएच स्केल से हो जाती है।
नीरा बेहद गुणकारी है। लोगों तक इसके गुणकारी लाभ की जानकारी पहुंचाने के लिए इसको प्रचारित करने की आवश्यकता है। नीरा में अनेकों पोषक तत्व होते है, जो स्वास्थ्य में लिया बहुत लाभकारी है। इससे गुड़, सक्कर, पेड़ा, केंडी आदि बनाएं जा सकते हैं। पतों से दैनिक उपयोग के प्राकृतिक उत्पाद जैसे चटाई, टोकरी, झाड़ू, आदि बनाएं जा सकते हैं।
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