Home Bihar खेलने-कूदने की उम्र में चौबीसों घंटे पेड़ और खाट से बंधा रहता है किशोर, मां की जुबानी सुनिए मार्मिक दास्‍तान

खेलने-कूदने की उम्र में चौबीसों घंटे पेड़ और खाट से बंधा रहता है किशोर, मां की जुबानी सुनिए मार्मिक दास्‍तान

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खेलने-कूदने की उम्र में चौबीसों घंटे पेड़ और खाट से बंधा रहता है किशोर, मां की जुबानी सुनिए मार्मिक दास्‍तान

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गोपालगंज. आमतौर पर जिस उम्र में बच्‍चे खेलते-कूदते हैं, जीवन के उस पड़ाव पर एक किशोर को चौबीसों घंटे बांधकर रखा जाता है. किशोर की मां को हमेशा यह भय सताता रहता है कि उनका बेटा कहीं भाग न जाए. जी हां…यह कहानी है मानसिक रूप से बीमार 14 साल के एक किशोर की. उनकी मां बताती हैं कि बचपन में उन्‍होंने अपने सबसे बड़े बेटे का इलाज कराने की कोशिश की थी, लेकिन गरीबी आड़े आ गई. पैसों के अभाव में वह अपने बेटे का संपूर्ण इलाज नहीं करवा सकीं. पिछले 10 वर्षों से हालात ये हैं कि उन्‍हें अपने ही बेटे को कभी पेड़ तो कभी खाट से बांधकर रखना पड़ता है. 14 वर्ष का यह क‍िशोर इलाज के अभाव में दयनीय तरीके से जीवन बिताने को विवश है.

जानकारी के अनुसार, किशोर को पेड़ से बांधकर रखने की यह मार्मिक तस्‍वीर गोपालगंज जिले के बरौली थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव की है. सिंधु देवी अपने ही लाल को पिछले 10 वर्षों से रस्‍सी से पेड़ में बांधकर रखने को मजबूर हैं. गरीबी और बीमारी की वजह से यह किशोर एक कैदी की तरह जीवन व्‍यतीत करने को विवश है. सिंधु देवी बताती हैं कि वह दिन में अपने बेटे को पेड़ से तो रात में खाट से बांधकर रखती हैं, ताकि मानसिक रूप से बीमार उनका बड़ा बेटा आकाश कहीं भाग न जाए. वह बताती हैं कि उनका बेटा चाहे जिस रूप में रहे, लेकिन उनकी आंखों के सामने रहे.

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किशोर की मां बताती हैं कि उनका बेटा कहीं भाग न जाए इसलिए उसे बांधकर रखती हैं. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

रखी जाती है विशेष नजर
सिंधु देवी बताती हैं कि वह अपने बेटे को दिन में पेड़ से तो रात में खाट से बांधकर रखती हैं. उन्‍हें डर है कि उनका बेटा कहीं भाग न जाए. भूख लगने पर आकाश कभी मिट्टी तो कभी वहीं पास में पड़ा कचरा तक खा लेता है. ऐसे में उसपर विशेष निगाह रखनी होती है, ताकि वह कुछ ऐसा न खा ले जिससे उसकी तबीयत को और नुकसान पहुंचे. सिंधु देवी ने बताया कि आाकाश उनके तीन बच्‍चों में सबसे बड़ा है.

4 साल की उम्र में हुआ था बुखार
बताया जाता है कि सलेमपुर गांव निवासी जनार्दन प्रसाद और सिंधु देवी के बेटे आकाश को 4 साल की उम्र में तेज बुखार हुआ था. गरीब परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि अपने बच्चे का इलाज करा सकें. इसके बावजूद किसी तरह अपनी क्षमता के मुताबिक अपने बच्चे का इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुआ. मानवता को शर्मसार करने वाली इस तस्वीर से स्थानीय लोग भी दुखी हैं. सिंधु देवी को कहीं से भी अभी तक मदद भी नहीं मिली है.

आपके शहर से (पटना)

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