Home Bihar बजट से शिक्षा-अस्पताल की सेहत में सुधार की उम्मीद: धन आए तो स्वस्थ्य हो जाएं बीमार अस्पताल; कोरोना ने सरकार को दिखाई है जमीनी हकीकत

बजट से शिक्षा-अस्पताल की सेहत में सुधार की उम्मीद: धन आए तो स्वस्थ्य हो जाएं बीमार अस्पताल; कोरोना ने सरकार को दिखाई है जमीनी हकीकत

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बजट से शिक्षा-अस्पताल की सेहत में सुधार की उम्मीद: धन आए तो स्वस्थ्य हो जाएं बीमार अस्पताल; कोरोना ने सरकार को दिखाई है जमीनी हकीकत

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पटनाएक घंटा पहले

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कोरोना ने सरकारी सिस्टम की पोल खोली है। स्वास्थ्य सेवा से लेकर शिक्षा व्यवस्था की खामी उजागर हुई है। कोरोना काल में अस्पतालों में इलाज और स्कूलों में शिक्षा की हकीकत सामने आई है। कोरोना वायरस ने यह बता दिया है कि अब आपात स्थितियों के लिए सरकार को नया इंफ्रास्टट्रक्चर तैयार करना होगा। बुनियादी सुविधाओं के लिए दमतोड़ रहे सरकारी अस्पताल और ऑनलाइन क्लास के लिए सिस्टम को कोसने वाले स्कूलों को बजट से मोटा पैकेज मिल जाए तो बिहार की व्यवस्था काफी हद तक सुधर जाएगी।

कोरोना काल में ऐसे रहे बिहार के हालात
कोरोना की हर लहर में बिहार के हालात खराब रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी लोगों पर भारी पड़ी। सेहत और शिक्षा पर कोरोना का बड़ा असर पड़ा है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मारामारी और सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन का सिस्टम नहीं होने से बच्चों ने बड़ी मार झेली है। कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी सिस्टम को देख हर कोई सरकार को कोसता रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों और सरकारी स्कूलों को लेकर हर किसी की बिहार बजट में बड़ी आस है। आम लोगों को कहना है कि इन दोनों क्षेत्रों की कमी कोरोना काल में पड़ी है, अब उम्मीद है कि इस बजट में स्कूलों और अस्पतालों को बड़ा पैकेज दिए जाने की उम्मीद है। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े एक्सपर्ट बजट से बड़ी उम्मीद बता रहे हैं।

बजट से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उम्मीद

  • सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के भवन के लिए बजट
  • सरकारी स्कूलों को ऑनलाइन व्यवस्था के लिए अपडेट किया जाए
  • खाली पड़े शिक्षक के पदों पर भर्ती के साथ स्कूलों में कम्प्यूटर ऑपरेटर लगाए जाएं।
  • स्कूलों में ऑनलाइन सिस्टम के लिए पूरी व्यवस्था बनाई जाए।

बजट से हेल्थ सेक्टर में बड़ी उम्मीद

  • प्राथमिक स्तर के अस्पतालों को रेफर सिस्टम की जद से बाहर लाया जाए।
  • डॉक्टरों की भर्ती करने के साथ खाली पड़े हेल्थ वर्करों की तैनाती की जाए।
  • ग्रामीण स्तर पर भी अस्पतालों को हर स्तर से स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने लायक तैयार किया जाए।
  • एम्बुलेंस की सेवा और सरकारी योजनाओं को लेकर विशेष निगरानी के साथ बजट दिया जाए।

IMA ने कहा बेहतर के लिए हो रहा प्रयास
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहजानंद प्रसाद सिंह का कहना है कि कोरोना काल में अस्पतालों पर लोड बढ़ा है। इस दौरान संसाधन की जरूरी महसूस हुई क्योंकि आपदा में अचानक से केस बढ़ गए। प्रयास किया जा रहा है कि व्यवस्था में सुधार किया जाए। इसके लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हमेशा सरकार को फीडबैक देता है और इस पर अमल भी हो रहा है। कोरोना के बाद संसाधनों को बढ़ाया गया है और उम्मीद लगातार बनी हुई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र को लेकर हमेशा से गंभीरता बरती गई है, केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में बेहतर प्रयास के साथ लगी है। वहीं शिक्षा को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि एजुकेशन सिस्टम को ऊपर लाना होगा, क्योंकि आधार तो एजुकेशन ही है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार में अध्ययन करने वाले नवनीत बताते हैं कि दोनों ही आवश्यक आवश्यकता है।

कोरोना काल में बच्चों का भविष्य पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। सरकार को स्कूलों में ऐसा सिस्टम तैयार करना चाहिए जिससे ऑनलाइन शिक्षा में कोई समस्या नहीं हो, इसी तरह स्वास्थ्य सेवा में भी निचले स्तर से सुधार का काम किया जाना चाहिए। गांव में भी लोगों की पूरी इलाज हो जाए बाहर नहीं जाना पड़े ऐसा सिस्टम लाना होगा।

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