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बिहार में अश्लील भोजपुरी गानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है. लेकिन, यह कोई एक दिन का मसला नहीं है. भोजपुरी में अश्लीला के खिलाफ यह लड़ाई कई सालों से चल रही है. अब जाकर बिहार पुलिस ने इसके खिलाफ कदम उठाया है. बिहार पुलिस मुख्यालय ने 15 फरवरी को एक एडवायजरी जारी कर सभी जिला पुलिस प्रमुखों से जातिसूचक और अश्लील गीत गाने वाले भोजपुरी गायकों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है. इसी संबंध में दो दिन पहले बक्सर पुलिस ने एक भोजपुरी सिंगर शिप्ली राज को गिरफ्तार किया है. इससे पहले एक और सिंगर अहमद राजा को गिरफ्तार किया गया. इन दोनों के खिलाफ गानों में अश्लील और जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने का आरोप दर्ज किया गया था.
दरअसल, भोजपुरी संगीत में अश्लीलता और द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग पिछले कुछ सालों में काफी ज्यादा बढ़ गया है. अब बीते कुछ समय से जाति सूचक शब्दों पर खूब गाने बनाए जा रहे हैं. इससे कहीं न कहीं माहौल खराब हो सकता है. ऐसे में पुलिस होली के पर्व को देखते हुए कड़ाई बरतने जा रही है.
लेकिन, सवाल यह है कि इतने दिनों से पुलिस कहां थी. भोजपुरी में इसी अश्लीलता के खिलाफ मुखर लड़ाई लड़ने के वाले एक युवा वकील हैं अविनाश कुमार. अविनाश ने चार साल पहले 2019 में इसको लेकर पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने भोजपुरी में अश्लीलता को लेकर जनहित याचिका दायर की थी. उनकी याचिका पर बाकायदा पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और हाईकोर्ट ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को इसको लेकर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया था.
पुलिस महानिदेशक को पत्र
इतना ही नहीं अविनाश ने उस वक्त बिहार के पुलिस महानिदेशक रहे गुप्तेश्वर पांडे को विस्तृत पत्र लिखा था. इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्य सचिव तक को उसकी प्रति भेजी गई थी. उस पत्र में उन्होंने 40 अश्लील गानों और उसके गायकों के नाम भी दिए थे. लेकिन पुलिस कान में तेल डाले सोई रही. फिर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने जनहित याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने बिहार सरकार और अन्य को पक्षकार बनाया. इस याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पटना के एसएसपी को आदेश दिया कि वह इसके खिलाफ उचित कार्रवाई करे.
पुलिस के इस एडवायजरी के बारे में अविनाश कहते हैं, ‘भोजपुरी एक भाषा है. यह हम सभी की विरासत है. कुछ लोगों को उनके निजी स्वार्थ के लिए इस भाषा को बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. यह समाज व्यवस्था से जुड़ा मसला है. बिहार पुलिस अभी जो कार्रवाई कर रही है वो स्वागत योग्य है. लेकिन, उसे बहुत पहले ही अश्लीलता के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी.’
अविनाश आगे कहते हैं कि बिहार के कुछ कथित गायकों ने इस भाषा को तहस-नहस कर दिया है. भोजपुरी की एक ऐसी छवि बना दी है जिसको लेकर हम सभी शर्म महसूस करने लगे हैं, जबकि हमारे भोजपुरी साहित्य का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है. लोक गीतकार भिखारी ठाकुर से लेकर शारदा सिन्हा तक की एक लंबी परंपरा रही है. इस लड़ाई में हम सभी को आगे आना होगा. यह केवल गायकों की गलती नहीं है. बल्कि हमारा समाज भी इसके लिए उतना ही दोषी है. वह इन गानों को चटकारे लेकर सुनता है. इससे इन कथित रोड छाप गायकों को बल मिलता है और वे भोजपुरी को गर्त में मिलाने पर तुले हुए हैं.
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टैग: Bhojpuri Cinema, पटना हाई कोर्ट
पहले प्रकाशित : 24 फरवरी, 2023, 14:10 IST
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